Thursday, February 26, 2026

Creating liberating content

मुझे नहीं आवभगत की...

DC मंडी के न आने से जनता हुई परेशान,मुझे नहीं आवभगत की जरूरत-...

राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने...

देवभूमि क्षेत्रीय संगठन और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने किया हिमाचल बीजेपी कार्यालय का...

जयराम ठाकुर ने PM...

यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए जयराम ठाकुर ने PM...

हिमाचल भाजपा कार्यालय का...

UGC के नए नियम तुगलकी फ़रमान राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी बुधवार सुबह 11 बजे...
HomeBreaking NEWSमोदी सरकार के...

मोदी सरकार के बजट पर CM सुक्खू का बड़ा बयान

अब हिमाचल प्रदेश का क्या होगा? मोदी सरकार के बजट पर CM सुक्खू का बड़ा बयान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया। जहां भारतीय जनता पार्टी से सर्वस्पर्शी और समावेशी बजट बता रही है।वहीं, दूसरी तरफ़ कांग्रेस ने इसे हिमाचल प्रदेश के साथ अन्याय करने वाला बजट बताया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बजट को स्पष्ट रूप से आम लोगों, मध्यम वर्ग, किसानों, बागवानों और विशेष रूप से पहाड़ी राज्यों की आवश्यकताओं के प्रति केंद्र सरकार की उदासीनता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोग इस बजट से निराश हैं। मध्यम वर्ग को आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र सरकार ने बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबावों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को राज्य-विशेष अनुदान दिए जाने का प्रावधान है, जिसे राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) कहा जाता है। वर्ष 1952 से लेकर 15वें वित्त आयोग के गठन तक केंद्र सरकार द्वारा ये अनुदान नियमित रूप से राज्यों को दिए जाते रहे हैं। लेकिन पहली बार 16वें वित्त आयोग ने इस अनुदान को बंद कर दिया है।

उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग के दौरान लगभग 37,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटा अनुदान दिए गए थे। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि 14वें वित्त आयोग की अवधि समाप्त होने के बाद, जब 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत होने में देरी हुई थी, तब भी पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर 11,431 करोड़ रुपये की सहायता राज्यों को प्रदान की गई थी।

आरडीजी की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिरता गंभीर रूप से प्रभावित

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि आरडीजी की समाप्ति से हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिरता, आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति और विकासात्मक निवेश गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। इससे राज्य को सेवा वितरण और बढ़ते कर्ज के बीच कठिन निर्णय लेने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार पक्ष रखने, विस्तृत ज्ञापन और तकनीकी प्रस्तुतियों के बावजूद केंद्र सरकार और वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश की वास्तविकताओं को नजरअंदाज किया जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यह स्थिति इस आशंका को और मजबूत करती है कि भाजपा शासित केंद्र सरकार कांग्रेस शासित राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।

कृषि क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधान हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य के लिए अपर्याप्त हैं, जहां भौगोलिक परिस्थितियां और खेती की लागत देश के मैदानी राज्यों से बिल्कुल भिन्न हैं। सेब उत्पादक, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था में लगभग 5,000 करोड़ रुपये का योगदान देते हैं और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं, उन्हें इस बजट में कोई पहचान, कोई सहायता और कोई नीति समर्थन नहीं मिला। यह बागवानों के साथ सीधा अन्याय है और हिमाचल की आर्थिकी पर प्रहार है। उन्होंने कहा कि पर्यटन, हिमाचल प्रदेश की पहचान और रोजगार का प्रमुख स्रोत है, इस क्षेत्र के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया। पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बौद्ध सर्किट का प्रस्ताव स्वागत योग्य है, लेकिन विश्व-प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों वाले हिमाचल प्रदेश को इससे बाहर रखना स्पष्ट भेदभाव को दर्शाता है। पर्वतीय मार्गों के विकास की घोषणा तो की गई है, लेकिन वास्तविक लाभ भविष्य के अस्पष्ट दिशा-निर्देशों पर छोड़ दिया गया है।

केन्द्रीय बजट 2026-27 हिमाचल प्रदेश के लिए न विकास का रास्ता दिखाता है, न न्याय का

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे विस्तार जैसे भानुपल्ली-बिलासपुर और बद्दी-चंडीगढ़ जैसी महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री ने ऋण सीमा को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भले ही बजट में पूंजी निवेश की बात करे, लेकिन पहाड़ी राज्यों के लिए आपदा से सुरक्षा, सड़क-रेल कनेक्टिविटी, जलविद्युत, पर्यटन और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए कोई ठोस या विशेष सहायता दिखाई नहीं देती। हिमालयी राज्यों के लिए अलग आपदा जोखिम सूचकांक और पारिस्थितिक संकेतकों को वित्तीय संवितरण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। केन्द्रीय बजट 2026-27 हिमाचल प्रदेश के लिए न विकास का रास्ता दिखाता है, न न्याय का। उन्होंने कहा कि राज्यों को दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि 1.5 लाख करोड़ रुपये तक ही सीमित रखी गई है और इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। साथ ही, इससे जुड़ी कठोर शर्तें हिमाचल जैसे छोटे और पहाड़ी राज्यों के लिए अनुकूल नहीं हैं, क्योंकि यहां विकास की लागत अधिक होती है। इसके अलावा, जीएसटी मुआवजा बंद होने से राज्य को हर वर्ष भारी राजस्व नुकसान झेलना पड़ रहा है।

यह बजट जन-विरोधी, किसान-विरोधी और हिमाचल-विरोधी है। हिमाचल सरकार वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन केंद्र सरकार से अपेक्षा करती है कि वह राज्यों के साथ संवाद, संवेदनशीलता और सहयोगी संघीयता की भावना को अपनाए। हिमाचल प्रदेश को नजरअंदाज कर भारत का समावेशी विकास संभव नहीं है। प्रदेश और यहां के लोगों के प्रति अन्याय के खिलाफ राज्य सरकार अपनी आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।

Get notified whenever we post something new!

spot_img

Create a website from scratch

Just drag and drop elements in a page to get started with Newspaper Theme.

Continue reading

मुझे नहीं आवभगत की जरूरत- यादविंदर गोमा

DC मंडी के न आने से जनता हुई परेशान,मुझे नहीं आवभगत की जरूरत- यादविंदर गोमा हिमाचल प्रदेश सरकार में खेल मंत्री यादविंदर गोमा ने मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगन के ख़िलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है. गोमा ने बताया...

राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने किया हिमाचल बीजेपी कार्यालय का घेराव

देवभूमि क्षेत्रीय संगठन और राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी ने किया हिमाचल बीजेपी कार्यालय का घेराव, हिमाचल बंद करने की दी चेतावनी UGC के नए नियमों के ख़िलाफ़ देश भर में आंदोलन तेज होता हुआ नज़र आ रहा है. शिमला में देवभूमि...

जयराम ठाकुर ने PM मोदी को दी बधाई

यूरोपीय संघ के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लिए जयराम ठाकुर ने PM मोदी को दी बधाई भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच के 18 सालों से अटकी डील आज पूरी हो गई. भारत और यूरोपीय संघ ने फ्री ट्रेड...

Enjoy exclusive access to all of our content

Get an online subscription and you can unlock any article you come across.