अदालत की अवमानना
Shimla: जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल तक पंचायती राज चुनाव संपन्न करवाने का आदेश दिया है। हिमाचल बीजेपी अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने पंचायती राज चुनावों को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। साथ ही कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया फैसला हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के हित में होने के साथ संविधान की पूर्ण भावना के अनुरूप है, जिसका प्रदेश की जनता ने दूर-दूर तक अभिनंदन किया है। इसके विपरीत माननीय मुख्यमंत्री ने उच्च न्यायालय के फैसले पर की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण, आपत्तिजनक और न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली है।
राजीव बिंदल का CM सुक्खू पर निशाना
हिमाचल BJP अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि जिस प्रकार की भाषा और शब्दों का प्रयोग किया गया है, वह उच्च न्यायालय की अवमानना के समान है। यह न केवल संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा आघात है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि हिमाचल प्रदेश राज्य चुनाव आयोग ने दिसंबर–जनवरी के महीनों में पंचायत चुनाव कराने के लिए संपूर्ण तैयारियां पूरी कर ली थीं। बावजूद इसके कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र और पंचायती राज व्यवस्था के खिलाफ जाकर चुनावों को टालने का हरसंभव प्रयास किया। जब यह मामला उच्च न्यायालय के समक्ष गया, तो न्यायालय ने जनता, लोकतंत्र और संविधान के पक्ष में स्पष्ट और मजबूत फैसला दिया।
CM सुक्खू ने क्या कहा था?
उच्च न्यायालय की डबल बेंच के आदेश को लेकर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पंचायती राज चुनाव के संबंध में उच्च न्यायालय के फ़ैसले के अध्ययन की बात कही थी. मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार भी अप्रैल-मई के महीने में चुनाव करवाना ही चाहती है, लेकिन अब तो अगर राज्य में लागू डिजास्टर ही व्यर्थ हो गया है. पंचायत चुनाव तो एक तरफ हैं, लेकिन सरकार अब इस बात का भी अध्ययन करेगी क्या संसद द्वारा पारित डिजास्टर एक्ट के कोई मायने हैं या नहीं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अदालत जाकर भी यह पूछेगी कि डिजास्टर के मायने क्या हैं.


