एक बार फिर सवालों के घेरे में शिमला में चल रहा फ़ोरलेनिंग का काम! दरार आने के बाद 15 मकानों को कराया खाली
शिमला में हो रहा फ़ोरलेनिंग का काम एक बार फिर सवालों के घेरे में है. अब शिमला शहर के साथ लगते चलौंठी इलाक़े में मकानों पर दरार आने की वजह 15 परिवारों को अपना घर ख़ाली करना पड़ा है. आरोप है कि निजी कंपनी टनलिंग के दौरान रात के वक़्त ज़ोरदार ब्लास्ट करती है. इसी के चलते यहां मकानों पर दरार आ गई हैं. शुक्रवार देर रात ही मकानों को ख़ाली करवा लिया गया था. अब शनिवार सुबह लोगों ने अपने घरों से सामान बाहर निकालना शुरू कर दिया है. मौक़े पर ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने लोगों की परेशानी जानी. साथ ही मांग उठायी कि जिन मकानों को ख़तरा हुआ है उन्हें जल्द से जल्द मुआवज़ा दिया जाए. स्थानीय लोगों में कंपनी के कथित लापरवाही के चलते भारी रोष देखा जा रहा है. पहले भी शिमला के भट्टाकुफर इलाक़े में एक पांच मंज़िला मकान भरभराकर गिर गया था, जिसका मुआवज़ा आज तक प्रभावित परिवार को नहीं मिल सका है.
डर के साये में जीने को मजबूर स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन भर की कमाई मकान बनाने में लगा दी. अब उनके मकानों पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है. जब फोरलेन का काम शुरू हुआ, तब उनके मकानों को एक्वायर किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा न होने की वजह से अब उन्हें डर के साये में जीना पड़ रहा है. लोगों ने आरोप लगाया कि बार बार कहने के बावजूद कम्पनी ब्लास्टिंग बंद नहीं करती और उनकी किसी तरह की कोई सुनवाई नहीं होती है. फ़िलहाल, इस पूरे मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और निर्माण कार्य में लगी निजी कंपनी का पक्ष सामने नहीं आया है.


